मंत्र सिद्ध क्यु नहीं होते ?
मन्त्र सिद्ध क्यों नहीं होते? अक्सर साधक कहते हैंकि उन्होंने इतने इतने मन्त्र जाप किया अनुष्ठान किया फिर भी उन्हें सिद्धि तो दूर की बात कोई प्रत्यक्ष लाभ तक होता नज़र नहीं आता है । मन्त्र विज्ञान एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया है । वर्तमान में मन्त्र-विद्या निष्फल और उपहास का विषय बनती जा रह है । लाखों, करोड़ों की संख्या में किया गया जाप और अनेकों सम्पादित अनुष्ठानों के पश्चात भी न तो उचित परिणाम दिखाते हैं , न कोई कार्य सफल होता है और न ही मन्त्र की सिद्धि होती है । अधिकतर साधक की कुपात्रता,उतवलीपन और शंकालु वृत्ति काफी सीमा तक इसके लिए जिम्मेदार है । भगवान शंकर कहते हैं। …… *जिह्वा दग्धा परान्नेन करौ दग्धौ प्रति ग्रहात्।* *मनो दग्धं परस्त्री भिः कथं सिद्धिर्वरानने॥* *वादार्थं पठ्यते विद्या परार्थं क्रियते जपः।* *ख्यार्त्यथं क्षीयते दानं कथं सिद्धिर्वरानने॥* *वादार्थं पठ्यते विद्या परार्थं क्रियते जपः।* *ख्यार्त्यथं क्षीयते दानं कथं सिद्धिर्वरानने॥* अर्थात .......... पराया अन्न खाने से जिनकी जिव्हा की शक्ति नष्ट हो गई, दान दक्ष...