Posts

भ्रममाकुमारी

 #ब्रह्मकुमारी_या_भ्रमकुमारी 'ओम् शान्ति', 'ब्रह्माकुमारी'... हम लोगों ने छोटे-बड़े शहरों में आते-जाते एक साइन बोर्ड लिखा हुआ देखा होगा *'प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय'* तथा मकान के ऊपर एक लाल-पीले रंग का झंडा लगा हुआ भी देखा होगा, जिसमें अंडाकार प्रकाश निकलता हुआ चित्र अंकित होता है। इस केन्द्र में व आसपास ईसाई ननों की तरह सफेद साड़ियों में नवयुवतियाँ दिखती हैं। वे सीने पर *'ओम् शान्ति'* लिखा अंडाकार चित्र युक्त बिल्ला लगाये हुए मंडराती मिलेंगी। आप *विश्वविद्यालय* नाम से यह नहीं समझना कि वहाँ कोई छात्र-छात्राओं का विश्वविद्यालय अथवा शिक्षा केन्द्र है, अपितु *यह सनातन धर्म के विरुद्ध सुसंगठित ढ़ंग से विश्वस्तर पर चलाया जाने वाला अड्डा है।* *स्थापना*:  इस संस्था का संस्थापक *लेखराज खूबचंद कृपलानी* था। इसने अपने जन्म-स्थान *सिन्ध* (पाकिस्तान) में दुष्चरित्रता व अनैतिकता का घोर ताण्डव किया, जिससे जनता में इसके प्रति काफी आक्रोश फैला। तब यह सिन्ध छोड़कर सन *1938 में* कराची भाग गया। इसने वहाँ भी अपना कुकृत्य चालू रखा, जिससे जनता का आक्रोश आसमान पर...

वैदिक विवाह कुष्मांडहोम प्रायश्चित

वैदिकविवाह में आयु अतिक्रमण और अपूर्ण कुष्मांड होम प्रायश्चित बना पाखंड :  देश काल स्थिति का सिद्धांत के पालन के साथ उचित समय पर उचित विधि विधान होने से ही सिद्धि की प्राप्ति होती है - कुष्मांड होम प्रायश्चित का कोई विरोध नहीं हम इस विधान का पूर्ण श्रद्धा से स्वीकार भी करते हैं। यह लेख से हमारा किसी की वैदिक आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं है। किसी के स्वीकार अस्वीकार से हमें कोइ फर्क नहीं पड़ता यह आपका निजी वैदिक अधिकार है - यह वैदिक समय सूचकता हेतु है - जो आजकल दुर्लभ है।शायद आधुनिक काल में किसी को पसंद न भी आए  वर्तमान समय के मेरे निजी वैदिक मर्यादा मूलक विचार है । मूल विषय पढ़ना गहन अभ्यास करना परिबलो का मर्यादा का भी विचार करना  उत्तमोत्तम विश्लेषण होता है।केवल लिखा है तो कर लिया और रहस्यो को न जानना पाखण्ड है -  वैदिक विवाहविधि से कन्यादान का उचित आरंभिक काल - अंतिमकाल अतिक्रमण -भूतकाल -वर्तमान काल पर विचार करें अंत तक जरूर पढ़ें  विद्वज्जनों को निवेदन है आप कोइ भी पक्ष रखें लेकिन सिद्धांत को , समयस्थिति को और जिस समय प्रायश्चित लिखा गया उस प्रायश्चितकाल पर उस ...

ग्रहों की डीग्री

 #Astrology_Degree_Consept केवल वैदिक द्विजों के लिए copyright post ©️  ब्रह्मांड में एक भचक्र की कल्पना करी है जिसे ३६०° डीग्री में वृताकार में पूर्वाचार्यों ने हमें ज्ञान दिया है। यह सब आप बाल्यावस्था में स्कूल आदि में इतिहास आदि पढ़ें हो तो ज्ञात ही होगा चलिए आज पुनः उसका अभ्यास करे - एक वृत निर्माण करेंगे जिसमें १२ भाग होंगे सभी में ३०° का एक भाग रहेगा इस प्रकार पूरा भचक्र होगा -  चंद्रमा १ घंटे बारह मिनट पूर्व अगली राशि का फल देते हैं जैसे कि १७ तारीख को चंद्रमा कन्या राशि में २९° का दोपहर २:२२ मिनट को था १ घंटे बारह मिनट के बाद तुला राशि में चंद्र ने राशि परिवर्तन किया - बाद में यह तुला राशि में आया आज वृश्चिक राशि में चंद्रमा 5° का है जो फलित के लिए है ।  यहां पर ध्यान दें सज्जनों ---  हम अंश पर चर्चा कर रहे हैं जबकि फलित से उपर एक संशोधन ही जाने जो आप सभी के मौलिक ज्ञान की अभिवृद्धि के लिए रखा है किसी वाद विवाद के लिए प्रचार के लिए नहीं। एक राशि का पूर्ण भोग 30° का होता है यदी चंद्रमा 25° का मू० त्रिकोण के अंशों से भी बलाबल का विचार करते हैं सार यह है क...

वेश्या का उद्धार

 : "वैश्या का उद्धार"           एक वैश्या थी। उसके मन में विचार आया कि मेरा कल्याण कैसे हो ? अपने कल्याण के लिए वह साधुओं के पास गई, उन्होंने कहा कि तुम साधुओं का संग करो, साधु त्यागी होते हैं, इसलिए उनकी सेवा करो तो कल्याण होगा।           फिर वह ब्राह्मणों के पास गई तो, उन्होंने कहा कि साधु तो बनावटी हैं, पर हम जन्म से ब्राह्मण हैं। ब्राह्मण सबका गुरु होता है। अतः तुम ब्राह्मणों की सेवा करोगी तो कल्याण होगा।           इसके बाद वह सन्यासियों के पास गई तो उन्होंने कहा कि सन्यासी सब वर्णों का गुरु होता है। इसलिए उनकी सेवा करने से कल्याण होगा। फिर वह वैरागियों के पास गई तो उन्होंने कहा कि वैरागी सबसे तेज होता है अतः उनकी सेवा करो तो कल्याण होगा।           फिर वह अलग-अलग संप्रदायों के गुरुओं के पास गई तो, उन्होंने कहा कि हम सबसे ऊंचे हैं शेष सब पाखंडी हैं। तुम हमारी चेली बन जाओ। हमारे से मंत्र ले लो तब हम वह बात बताएँगे जिससे तुम्हारा कल्याण हो जाएगा।           इ...

ज्योतिषीय समाधान

आप अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण करवाना चाहते हैं, ज्योतिषीय प्रश्नो का उत्तर चाहते हैं, अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं, रत्न धारण कराना चाहते हैं, ग्रहो की शांति, जाप अनुष्ठान कराना चाहते हैं या किसी भी प्रकार के शुभ मूहूर्त की जानकारी चाहते हैं तो आचार्य जी को संदेश भेजकर प्रत्युत्तर की प्रतिक्षा करके मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं  नारायण  

सूर्य संबंधित कार्य

 सरकारी नौकरी , सरकारी सेवा , उच्च स्तरीय प्रशासनिक सेवा , मजिस्ट्रेट , राजनीति , सार्वजनिक क्षेत्र में सोने का काम करने वाले , जौहरी, स्वर्ण विक्रय, फाईनान्सर , प्रबन्धक , , राजदूत , चिकित्सक (फिजिशियन), दवाइयों से संबंधी मैनेजमेंट ,  उपदेशक , मंत्र कार्य , फल विक्रेता (Astrology) , वस्त्र , घास फूस ( नारियल रेशा ,चटाई, बांस तृण आदि ) से निर्मित सामाग्री , तांबा , स्वर्ण, माणिक , सींग या हड्डी के बने समान,डेयरी फार्मिंग या बागवानी/खेती बाड़ी,चामर आदि निर्माण छाता आदि से, सूचनाओं के आदान प्रदान से जीविका (जैसे सट्टा लाटरी के अंक, विशिष्ट गोपनीय सूचना देकर , पुलिस आदि में खबरिया, ) धन विनियोग (पैसा  जमा करके या करवाकर उच्च लाभ कमाना) बीमा एजेंट , सरकारी मुखबीर , गेहूं से संबंधी ,विदेश सेवा , उड्डयन , ओषधि विक्रय, निर्माण या प्रयोग, चिकित्सा , प्रेत कार्य (शवदाह, मृतक संस्कार,बाधा निवारण) दुष्कर्म, यात्रा या विवाह,सभी प्रकार के लाल रंग के अनाज , लाल रंग के पदार्थ , शहद , लकड़ी व प्लाई वुड का कार्य , चतुर्थ से संबंध बनाकर इमारत बनाने मे काम आने वाला लकड़ी , सर्राफा , वानिकी ...

कर्णवेध संस्कार

चूडाकरणम् कर्णवेध श्री:।। सांवत्सरिकस्य चूडाकरणम् ≈> १ वर्ष पूर्ण होने के बाद बालक का मुण्डन करावे // तृतीये वाऽप्रतिहिते ।। तीसरा वर्ष पूर्ण होने के बाद चूड़ाकर्म करना चाहिए ≈ आजकल न तो वैदिक परंपरा मिलती है न तो कुल परंपरा न तो कुल गुरु का भी कोइ अता-पता होता है इसलिए अपने कुल परंपरा के अनुसार शास्त्र संमत सभी संस्कार करने चाहिए, इस संस्कार से पूर्व तीन सदाचारी ब्राह्मण को भोजन कराने की भी विधि है। बालक के जन्मनक्षत्र से ताराबल चन्द बल आदि देखकर शुभ योग में चूड़ा कर्म करें - अन्य जो भी चूड़ा कर्म के प्रमाण है वे सभी गौणकाल के है एसे गौणकाल में चूड़ाकर्म नहीं करना चाहिए - ≈» *कर्णवेध संस्कार* का सभी गृह्य सूत्रकारों ने विस्तार से उल्लेख नहीं किया है, किन्तु हमारे देश के परिवारों में प्रचलित है। बच्चे की प्रथम सालगिरह-अव्दपूर्ति होने पर *चूडाकर्म के साथ उसी दिन अच्छी लग्न देखकर बच्चे का कर्णवेध करते है* वस्त्र-आभूषण आदि से अलंकृत कर माता अपनी गोद में बैठा लेती है। गाँव के स्वर्णकार या वैद्य को बुलाकर स्वर्ण की शलाका से दाहिने कान को पहले और बाँयें कान को बाद में वेधकर शलाका को मोड...