दक्षिणा

 दक्षिणा का महत्व -:- 


बिना दक्षिणा किया हुआ कर्म वृथाक्रिया हो जाती है जिसका कोइ फल नही मिलता -:- अल्प दक्षिणा से कर्म विफल होता है।


*ददाति नो दानं ग्रहीता तन्न याचते॥ उभौ तौ नरकं यातश्छिन्नरज्जुर्यथा घटः । नार्पयेद्यजमानश्चेद् याचितारं च दक्षिणाम् ॥ भवेद् ब्रह्मस्वापहारी कुम्भीपाकं व्रजेद् ध्रुवम् । वर्षलक्षं वसेत्तत्र यमदूतेन ताडितः ॥ ततो भवेत् स चाण्डालो व्याधियुक्तो दरिद्रकः । पातयेत् पुरुषान् सप्त पूर्वान् वै पूर्वजन्मनः ॥(ब्रह्मवैवर्त ० प्रकृतिखण्ड ४२।६०-६३)”*


अर्थ 👇


उचित दक्षिणा न दैने वाले यजमान और दक्षिणा के अधिकारी ब्राह्मण दक्षिणा की याचना न करे तो दौनों नरक में जाय


उचित दक्षिणा न दैनेवाला यजमान कुम्भीपाकनरक कौ तीनलाख वर्षतक यमदूतों से यातना भूगतकर पृथ्वीपर दरिद्र चाण्डाल योनि में जन्म लेता हैं, दक्षिणा न दैनेवाले यजमान अपने पूर्व के सातपिढी़ के पितरों का भी नरक में पतन करवाता हैं।

⭕ जय महादेव ‼️

पं० धवलकुमार शास्त्री गुजरात

Comments

Popular posts from this blog

Copyright

सूर्य संबंधित कार्य

भूत प्रेत