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दक्षिणा

 दक्षिणा का महत्व -:-  बिना दक्षिणा किया हुआ कर्म वृथाक्रिया हो जाती है जिसका कोइ फल नही मिलता -:- अल्प दक्षिणा से कर्म विफल होता है। *ददाति नो दानं ग्रहीता तन्न याचते॥ उभौ तौ नरकं यातश्छिन्नरज्जुर्यथा घटः । नार्पयेद्यजमानश्चेद् याचितारं च दक्षिणाम् ॥ भवेद् ब्रह्मस्वापहारी कुम्भीपाकं व्रजेद् ध्रुवम् । वर्षलक्षं वसेत्तत्र यमदूतेन ताडितः ॥ ततो भवेत् स चाण्डालो व्याधियुक्तो दरिद्रकः । पातयेत् पुरुषान् सप्त पूर्वान् वै पूर्वजन्मनः ॥(ब्रह्मवैवर्त ० प्रकृतिखण्ड ४२।६०-६३)”* अर्थ 👇 उचित दक्षिणा न दैने वाले यजमान और दक्षिणा के अधिकारी ब्राह्मण दक्षिणा की याचना न करे तो दौनों नरक में जाय उचित दक्षिणा न दैनेवाला यजमान कुम्भीपाकनरक कौ तीनलाख वर्षतक यमदूतों से यातना भूगतकर पृथ्वीपर दरिद्र चाण्डाल योनि में जन्म लेता हैं, दक्षिणा न दैनेवाले यजमान अपने पूर्व के सातपिढी़ के पितरों का भी नरक में पतन करवाता हैं। ⭕ जय महादेव ‼️ पं० धवलकुमार शास्त्री गुजरात

शिवरात्रि पूजा संकल्प

 शिवरात्रौ संक्षिप्त चतुर्यामयामपूजा - संकल्प:- नमो भगवते रुद्राय । विष्णुः विष्णुः विष्णुः। फाल्गुनमासे(माघमासे)कृष्णपक्षे त्रयोदश्यां (चतुर्दश्यां )तिथौ __वासरे श्रीसाम्बसदाशिवप्रीत्यर्थं प्रथमयामपूजां (द्वितीययाम/तृतीययाम/चतुर्थयाम पूजां) करिष्ये। यथालाभ उपचारद्रव्य से गणपति का संक्षिप्तपूजन करें, तदनन्तर "शिवाय नमः" इसी मन्त्र से मिट्टी का शिवलिंग निर्माण करे जो अंगुठे से लेकर बारह अंगुल तक के प्रमाण में से यथानुकूल व्यवस्थानुरूप हो। ह्रीं ईशानाय नमः - मन्त्र से आसन , पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, दुग्धस्नान करावें, शिवपंचाक्षर स्तोत्र "नागेन्द्रहाराय ०० आदितः" से पल्लव या पुष्प की सहायता से दूध से ही अभिषेक करें। (द्वितीय प्रहर में दहीं से, तृतीय प्रहरमें केवल घृत , चतुर्थ प्रहर में शहद से स्नानाभिषेक करें) अभिषेकान्ते जल द्वारा सीधे हाथ से अन्य पात्र में तर्पण करे " सभी नाम के अन्तमें "तर्पयामि" पद लगावें "भवं देवम्" शर्वं देवम्" ईशानं देवम्" पशुपतिं देवम्" रुद्रं देवम्" उग्रं देवम्" भीमं देवम्" महान्तं दे...