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Showing posts from October, 2025

ज्योतिषीय समाधान

आप अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण करवाना चाहते हैं, ज्योतिषीय प्रश्नो का उत्तर चाहते हैं, अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं, रत्न धारण कराना चाहते हैं, ग्रहो की शांति, जाप अनुष्ठान कराना चाहते हैं या किसी भी प्रकार के शुभ मूहूर्त की जानकारी चाहते हैं तो आचार्य जी को संदेश भेजकर प्रत्युत्तर की प्रतिक्षा करके मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं  नारायण  

सूर्य संबंधित कार्य

 सरकारी नौकरी , सरकारी सेवा , उच्च स्तरीय प्रशासनिक सेवा , मजिस्ट्रेट , राजनीति , सार्वजनिक क्षेत्र में सोने का काम करने वाले , जौहरी, स्वर्ण विक्रय, फाईनान्सर , प्रबन्धक , , राजदूत , चिकित्सक (फिजिशियन), दवाइयों से संबंधी मैनेजमेंट ,  उपदेशक , मंत्र कार्य , फल विक्रेता (Astrology) , वस्त्र , घास फूस ( नारियल रेशा ,चटाई, बांस तृण आदि ) से निर्मित सामाग्री , तांबा , स्वर्ण, माणिक , सींग या हड्डी के बने समान,डेयरी फार्मिंग या बागवानी/खेती बाड़ी,चामर आदि निर्माण छाता आदि से, सूचनाओं के आदान प्रदान से जीविका (जैसे सट्टा लाटरी के अंक, विशिष्ट गोपनीय सूचना देकर , पुलिस आदि में खबरिया, ) धन विनियोग (पैसा  जमा करके या करवाकर उच्च लाभ कमाना) बीमा एजेंट , सरकारी मुखबीर , गेहूं से संबंधी ,विदेश सेवा , उड्डयन , ओषधि विक्रय, निर्माण या प्रयोग, चिकित्सा , प्रेत कार्य (शवदाह, मृतक संस्कार,बाधा निवारण) दुष्कर्म, यात्रा या विवाह,सभी प्रकार के लाल रंग के अनाज , लाल रंग के पदार्थ , शहद , लकड़ी व प्लाई वुड का कार्य , चतुर्थ से संबंध बनाकर इमारत बनाने मे काम आने वाला लकड़ी , सर्राफा , वानिकी ...

कर्णवेध संस्कार

चूडाकरणम् कर्णवेध श्री:।। सांवत्सरिकस्य चूडाकरणम् ≈> १ वर्ष पूर्ण होने के बाद बालक का मुण्डन करावे // तृतीये वाऽप्रतिहिते ।। तीसरा वर्ष पूर्ण होने के बाद चूड़ाकर्म करना चाहिए ≈ आजकल न तो वैदिक परंपरा मिलती है न तो कुल परंपरा न तो कुल गुरु का भी कोइ अता-पता होता है इसलिए अपने कुल परंपरा के अनुसार शास्त्र संमत सभी संस्कार करने चाहिए, इस संस्कार से पूर्व तीन सदाचारी ब्राह्मण को भोजन कराने की भी विधि है। बालक के जन्मनक्षत्र से ताराबल चन्द बल आदि देखकर शुभ योग में चूड़ा कर्म करें - अन्य जो भी चूड़ा कर्म के प्रमाण है वे सभी गौणकाल के है एसे गौणकाल में चूड़ाकर्म नहीं करना चाहिए - ≈» *कर्णवेध संस्कार* का सभी गृह्य सूत्रकारों ने विस्तार से उल्लेख नहीं किया है, किन्तु हमारे देश के परिवारों में प्रचलित है। बच्चे की प्रथम सालगिरह-अव्दपूर्ति होने पर *चूडाकर्म के साथ उसी दिन अच्छी लग्न देखकर बच्चे का कर्णवेध करते है* वस्त्र-आभूषण आदि से अलंकृत कर माता अपनी गोद में बैठा लेती है। गाँव के स्वर्णकार या वैद्य को बुलाकर स्वर्ण की शलाका से दाहिने कान को पहले और बाँयें कान को बाद में वेधकर शलाका को मोड...