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Showing posts from May, 2023

शुभलक्ष्मी

 धन / पैसा तो वेश्या भी कमाती है,चोर डाकु लूटेरे भी कमाते हैं,चाहे जो भी मजबूरी रही हो यह अनीति का धन है। अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति।प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति।। चाणक्य जी कहते हैं  अन्याय और गलत कार्यों से कमाया हुआ धन ज्यादा से ज्यादा 10 वर्षों तक ही व्यक्ति के पास रह सकता है। 11वें वर्ष से उस व्यक्ति के धन का विनाश होना शुरू हो जाता है। चाणक्य नीति के अनुसार पापकर्म द्वारा या किसी को कष्ट और क्लेश पहुंचाकर कमाया पैसा अभीशापित होकर मनुष्य का नाश कर देता है। इस धन के प्रभाव से सज्जन पुरुष भी पाप की और बढ़ने लगते हैं। इसलिए ऐसे पैसाें से बचना चाहिए, वरना जल्दी ही कुल सहित उस इंसान का नाश हो जाता है। आचार्य चाणक्य बताते हैं कि ऐसा धन दस साल से ज्यादा नहीं टिक पाता। उसके बाद दुगना खर्चा या नुकसान होकर ऐसा पैसा चला जाता है।

मंत्र जप निषेध

 मंत्र तारक भी है, मंत्र मारक भी है। ईश्वर उवाच - पुस्तके लिखितान्मन्त्रानवलोक्य जपेत्तु यः। स जीवन्नेव चाण्डालो मृतः श्वानो भविष्यति॥ दीक्षामार्गं विना मन्त्रं शैवं शाक्तञ्च वैष्णवम्। यो जपेत्तं दहत्याशु देवता च जुगुप्सति॥ दीक्षाविधिं विना मन्त्रं यो जपेत्कोटिकोटयः। न स सिद्धिमवाप्नोति सिन्धुसैकतवर्षवत्॥ पुस्तक लिखित मन्त्र को देखकर जो जप करता है वह जीवन में चाण्डाल होता है। मरने पर कुत्ता योनि में जन्म लेता है। विधिवत् दीक्षा लिये बिना जो साधक शैव, शाक्त या वैष्णव मन्त्रों का जप करता है उसे देवता दग्ध कर देते हैं और वह देवता की दृष्टि में जुगुप्सित एवं घृणित हो जाता है। विधिवत् दीक्षा ग्रहण के बिना जो साधक मन्त्र जप करता है उसे करोड़ो-करोड़ो मन्त्र जप के बाद भी सागर के बालू-कणों की संख्या के बराबर भी वर्षों तक सिद्धि नहीं मिलती। इसलिये सभी प्रयत्नों से कुलगुरु/ब्राह्मण के मुख से उपदेश-क्रम से मन्त्र की दीक्षा अवश्य लेना चाहिए। जय शिवशंकर

प्रायश्चित

 प्राय: - तप ,चित्त निश्चय = तपनिश्चय  निश्चय के साथ किया जाने वाला तप निश्चय के साथ किए जाने वाले तप का संकल्प प्रायश्चित अंजाने में किए गए पाप की शुद्धि स्वधर्माचरण से होती है और जानकर/मोह से  किए जानेवाले पापों की शुद्धि भिन्न भिन्न प्रायश्चितो से होती है व्रतो से होती है।