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Showing posts from March, 2024

गर्भधान की जानकारियां

 पुत्रप्राप्ति निमित्तक चैत्र शुक्ल तृतीया को #सौभाग्यशयन नामक व्रत करना चाहिए..  प्रारम्भ चैत्र शुक्ल तृतीया से लेकर प्रतिमास की शुक्लपक्ष की तृतीया को एक वर्षतक करना चाहिए, प्रातःकाल तिलों से स्नान करे.  ###### उपवास में ग्राह्य द्रव्य##### दिनभर जलभी ग्रहण न करे...  चैत्र शुक्ल 3- गाय के सींग में समाजाय इतना पानी रात में पीकर शयन करे.   वैशाख शुक्ल 3-- गोबर तथा जल  ज्येष्ठ शुक्ल 3- आक के फूल को सूँघना, जल आषाढ शुक्ल 3- बेलपत्र का सेवन जल के साथ श्रावण शुक्ल 3- गाय के दूध से बना दहीं, जल भाद्रपद शुक्ल 3- कुश मिला जल आश्विन शुक्ल 3- गाय का दूध कार्तिक शुक्ल 3- गाय का घी मार्गशीर्ष शुक्ल 3-- गौमूत्र पौष शुक्ल 3- गाय का घी माघ शुक्ल 3- कालेतिल , जल फाल्गुन शुक्ल 3- गाय का मूत्र, गोबर, गाय का दूध, गाय का घी, गाय का दहीं और कुशमिश्र जल (विशेष शूद्र को काली गाय के सब द्रव्य ग्रहण करना चाहिए परंतु सफेद गाय का बिलकुल नहीं) विधा -गणपतिजी का स्मरण, गौरीशंकर की चित्र प्रतिमा पर चन्दन, कुमकुम मिश्र अक्षत और मास के अनुसार जो मिले वह पुष्प चढाना चाहिये "(गौर...

विदेशयात्रीओ के कल्याण हेतु

 ब्रह्महत्यारे आदि एवं विशेष विदेशयात्री (म्लेच्छदेश यात्री) आदि पतितो के लिये परोपकारार्थ मरणोत्तरीविधान क्रम लिख रहे हैं, किसी की द्वेषभाव से निंदा करने के लिए नहीं। आजकल धर्म के नाम पर  विदेशयात्रा अधिक हो रही हैं परन्तु विदेशयात्रा एक पतनीय पातक हैं जिसकी शुद्धि कलियुग में प्रायश्चित्त करलेनेपर भी नहीं होती ऐसे मृतको की मरणोत्तरीक्रिया का वर्णन जानना आवश्यक हैं कि पतितों के लिये शास्त्र की आज्ञा क्या हैं ? अज्ञानतावश यात्रा की हो और पश्चाताप हो - तो जरूर इस शास्त्रोक्त विधि का अनुगमन करे - बोधायनधर्मसूत्र प्रश्न २/अध्याय  १/ खण्ड २ /सूत्र १-२ अथ पतनीयानि। समुद्रसंयानम्(द्वीपान्तर- म्लेच्छदेशे गमनम्)। आत्महत्यारे, पाखंडी, महापातकी, व्यभिचारिणी स्त्री- आदि पतितो के स्नान, जनेऊ संस्कार, मरणोत्तरी-श्राद्ध सपिंडीकरण आदि नहीं करना चाहिए ----  *पाखण्डमाश्रिताश्चैव महापातकिनस्तथ। स्त्रियश्च व्यभिचारिण्य आरूढपतितास्तथा। न तेषां स्नान संस्कारो न श्राद्धं न सपिण्डनम् ।। भविष्य पुराणे ।।* पतितों का दाह(अग्निसंस्कार, अंत्येष्टिकर्म )और अस्थिसंचय , रोना ,पिण्डश्राद्ध आदि कभी भ...