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जिसकी बुद्धि बिगडी हो

  यह उपाय करे जिसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई हो  घरमें पवित्रतासे रसोई करो। रसोईघरको पवित्र रखना चाहिये। रसोईघर अन्नपूर्णाजीका मन्दिर है।  साधारण कोई मानव रसोईघरमें आये नहीं, अन्न-जलको छुए नहीं। स्पर्शसे अनेक दोष उत्पन्न होते हैं—रसोईघरको पवित्र रखो।  बहुत- से लोग चप्पल पहन करके रसोईघरमें जाने लगे हैं- ‍अपनेको बड़ा सयाना समझते हैं; ऐसा मानते हैं कि हम तो सुधरे हुए हैं। “सुधरे हैं कि बिगड़े हैं—ये तो भगवान् ही जाने !  रसोईघर अन्नपूर्णाजीका मन्दिर है - पवित्रतासे रसोई करो। कभी बाजारका खाना नहीं। बाजारका जो खाता है, उसकी बुद्धि बहुत बिगड़ती है।  बाजारकी वस्तुमें अनेककी नजर पड़ती है— दृष्टिदोष आता है। बाजारकी वस्तुमें स्वच्छता भले ही हो जाय - पवित्रता जरा भी नहीं होती ।  छ: महीनेतक बाजारका खाना छोड़ो, घरमें पवित्रतासे रसोई करो- भगवान्‌को भोग लगाओ।  छ: महीना पवित्र अन्न पेटमें जाय, फिर देखो - बुद्धि कैसी सुधरती है! ।।श्री डोंगरे जी महाराज की वाणी!!

बिल्वाष्टक

 #बिल्वपत्र_चढाने_के_108_मन्त्र - त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् । त्रिजन्म पापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥१॥ त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः । तव पूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥२॥ सर्वत्रैलोक्यकर्तारं सर्वत्रैलोक्यपालनम् । सर्वत्रैलोक्यहर्तारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥३॥ नागाधिराजवलयं नागहारेण भूषितम् । नागकुण्डलसंयुक्तं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥४॥ अक्षमालाधरं रुद्रं पार्वतीप्रियवल्लभम् । चन्द्रशेखरमीशानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥५॥ त्रिलोचनं दशभुजं दुर्गादेहार्धधारिणम् । विभूत्यभ्यर्चितं देवं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥६॥ त्रिशूलधारिणं देवं नागाभरणसुन्दरम् । चन्द्रशेखरमीशानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥७॥ गङ्गाधराम्बिकानाथं फणिकुण्डलमण्डितम् । कालकालं गिरीशं च एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥८॥ शुद्धस्फटिक सङ्काशं शितिकण्ठं कृपानिधिम् । सर्वेश्वरं सदाशान्तं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥९॥ सच्चिदानन्दरूपं च परानन्दमयं शिवम् । वागीश्वरं चिदाकाशं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥१०॥ शिपिविष्टं सहस्राक्षं कैलासाचलवासिनम् । हिरण्यबाहुं सेनान्यं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥११॥ अरुणं वामनं तारं वास्तव्यं चैव वास...