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सूर्य

सूर्य स्तुति हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को जीवन का आधार, ऊर्जा का स्रोत और सत्य का प्रतीक माना गया है। उन्हें प्रत्यक्ष देवता कहा गया है, क्योंकि वे प्रत्यक्ष रूप में दृष्टिगोचर होते हैं। सूर्य देव की उपासना से आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, तेज, और मान-सम्मान प्राप्त होता है। सूर्य स्तुति का नियमित पाठ जीवन में सफलता, मानसिक स्पष्टता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। सूर्य भगवान की स्तुति आदित्याय च सोमाय मङ्गलाय बुधाय च। गुरु शुक्र शनिभ्यश्च राहवे केतवे नमः॥ जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥ आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥ सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम्। श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणम्यहम्॥ सप्तलोकप्रकाशं च तेजोराशिं समुद्भवम्। सप्तवर्णैः समायुक्तं सूर्यं देव नमोऽस्तु ते॥ यः शत्रूणां विनाशाय रक्षणाय च सज्जनम्। सदैव पथदर्शी च तं सूर्यं प्रणम्यहम्॥ सर्वदोषहरं देवं सर्वरोगनिवारणम्। अर्जुनस्य सखा कृष्णे साक्षात् देवदिवाकरः॥ नमस्ते रविरूपाय नमस्ते दिव्यचक्षुषे। नमस्ते सर्वलोकस्य जीवनं तेजसां न...