देवलक विशेष

 किन देवलको को कर्मकांड आदि विधि और प्रतिग्रह का अधिकार नही रहता ? अधिकार को कैसे सुरक्षित रखे ? इनको विशेष प्रायश्चित करते करते अधिकार को सुरक्षित रखा जा सकता है।जिनके पास अधिकार ही नही उनके लिए तो पहले अधिकार की प्राप्ति जरूरी है-


#देवलक अर्थात् #देवमन्दिरका_पुजारी


 'अपरार्क'  स्मृति वचन उद्धृत कर *देवलक* की परिभाषा दी है और कहा है कि देवलक वह ब्राह्मण है जो किसी प्रतिमा का पूजन पारिश्रमिक के आधार पर तीन वर्षों तक करता है, जिसके लिए वह श्राद्धों के पौरोहित्य के लिए अयोग्य हो जाता है। स्पष्ट है, इस कथन के अनुसार देवलक ब्राह्मण वित्तार्थी है । 


मनु (३।१५२) ने *देवलक* को श्राद्धों तथा देवताओं के सम्मान में किये गये कृत्यों में निमन्त्रित किये जाने के लिये अयोग्य घोषित किया है । 


कुल्लूक ने देवल को उद्धृत कर इस विषय में कहा है कि जो व्यक्ति किसी देव स्थान के कोष पर निर्भर रहता है, उसे *देवलक* कहा जाता है। 


वृद्ध हारीत (८/७७-८०) के मत से केवल शिव के वित्तार्थी पूजक *देवलक* कहे जाते हैं।


जय महादेव 


पं० धवलकुमार शास्त्री गुजरात

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