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Showing posts from June, 2024

सेंधा नमक ही खाए -

 पढ़िये सेंधा नमक की हकीकत....... "सेंधा नमक के साथ इन अंग्रेजो ने कैसे किया था खिलवाड़ "  भारत से कैसे गायब कर दिया गया... आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ?? आइये आज हम आपको बताते है कि नमक मुख्यत: कितने प्रकार का होता है। एक होता है समुद्री नमक, दूसरा होता है सेंधा नमक "rock salt"सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है। पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’, लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है । वहाँ से ये नमक आता है। मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़ते हैं। अतः: आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले। काला नमक ,सेंधा नमक प्रयोग करे, क्यूंकि ये प्रकृति का बनाया है, भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीयां भारत में नमक के व्यापार ...

अशास्त्रीय मंदिर मान्य नहीं है

 #कलियुग की वर्तमान स्थिति में #नूतन_मंदिरों की आवश्यकता क्यूँ नहीं ? पूरा विवरण पढैं.. (१) भारतवर्ष में इतने पुराने मंदिरों हैं कि जिसका पुनरोद्धार कर वैदिक अनुशासन से संचालित करने की आवश्यकता हैं |  (२) वर्तमान में किस वर्ण के व्यक्ति को कौनसे देवताओं की प्राणप्रतिष्ठा करनी चाहिये इनके अधिकारी कौन हैं यह बिना जाने ही प्रतिष्ठाएँ होती हैं |  (३)मंदिरों की स्थापत्य कला जाननें वाले विश्वकर्मा के वंशज की संख्या कम और अपने नित्यकर्मों से च्युत हैं | सोमपुरा शिल्पी की जगह किसी भी वर्ण के कारीगर मानहिन और शल्यदोष पूर्ण मंदिरों की रचना करतें दिख रहैं हैं जिसमें न उपयोग में लिए जाने वाले शल्य विधिहिन निर्मित ईंट, बिना शिल्पशास्त्र से चकासे पत्थर, रेती, लोहा आदि का उपयोग होता हैं |  (४) महत्वपूर्ण निर्माण से पहिले  भूमिशोधन के लिए उपयुक्त भूमि भी नहीं देखतें जहाँ जिन्हों ने बताया वहाँ बिना भूमिपरिक्षण किए भूमिग्रहण करकें |भूमिपूजन(खात मुर्हूत) जूठे दूर्मुर्हूतों में फूरसत के दिन में होतें हैं, शिलान्यास से पूर्व शल्यशोधन अनुचित हो रहैं हैं | न कोई क्षेत्रफल की आयव्यय दे...

जयचंद गद्दार नही था

 इतिहास में एक सबसे बड़ा अन्याय महाराज जयचंद के साथ हुआ है। पृथ्वीराज रासो के आधार पर जयचंद्र को देशद्रोही ठहराया गया है ,किन्तु आधुनिक इतिहासकार जयचंद को गद्दार की जगह एक महान दानी राजा माना है। जयचंद के समय के अब तक १४ दानपत्र मिल चुके है। पृथ्वीराज- चंदेल युद्ध में जयचंद ने चन्देलों की सहयता की थी , हो सकता है , इसी से चिढ़कर चौहानों ने पृथ्वीराज रासो में उसे गद्दार लिख दिया हो?? या फिर योजनाबद्ध तरीके से इतिहास को कलंकित करने का यह षड्यंत्र हुआ हो।   #जयचन्द_कौन_थे--  त्यक्तवा देहं सं शुद्धात्मा चन्द्रकान्त्यां सुतोभवत।। जयचन्द्र इतिख्यातो बाहुशाली जितेंद्रिय ।। भविष्यपुराण का इस श्लोक का अर्थ है कि जयचन्द्र एक शुद्ध आत्मा और प्रतापी ओर जितेंद्रिय शासक था।   उसका छोटा भाई रत्नभानु था, जिसने गोड़ , मरु तथा बंगाल देशों में विजय प्राप्त की । ( यह भी भविष्यपुराण से लिया गया है - भविष्य पुराण - प्रतिसर्ग पर्व ३.५.१-४) जब मैने भविष्यपुराण की यह घटना पढ़ी, तो मव समझ गया, की पृथ्वीराज चौहान और जयचन्द क् वास्तविक बैर क्या था ? जयचन्द की मरुभूमि पर भी विजय का...