भागवत कथा वक्ता को मुंडन कराना चाहिए
#कथावाचकोंको_मुण्डन_कराना_चाहिए 🚩
श्रीराम!
भागवतवक्ता के लिए क्षौर ( मुण्डन) का विधान है-- #वक्त्रा_क्षौरं_प्रकर्तव्यम्"
(भाग.मा.६-२३)
फिर आजकल के कथक्कड़ कथक्कड़ीया मुण्डन क्यों नहीं कराते?
यदि कथक्कड़ छोकड़ियाँ यह कहें कि श्लोक में #वक्त्रा ( पु.) ही कहा है, #वक्त्री ( स्त्री.) नहीं कहा है, अतः लड़कियों को मुण्डन कराना आवश्यक नहीं है। तो यहाँ यह प्रश्न भी तो मुह बाये खड़ा होगा कि-- भागवत में विरक्तो वैष्णवो विप्रो कहा है, दृष्टान्तकुशलः कहा है, ये सब पुलिङ्ग में हैं, विरक्ता, वैष्णवी कुशला विप्रा आदि स्त्री लिङ्ग पद भी तो नहीं हैं??😂
यदि विधि का अतिक्रमण करके अनुष्ठान हुआ तो कोई ऐहिक आमुष्मिक गति नहीं होने वाली है। यजमान की भी व कथक्कड़ कथक्कडियों की भी।
विशेष रूप से उन कथक्कडीयों को जो #सच्चिदानन्दरूपाय के आधार पर भागवत का आरम्भ #सच से मानतीं हैं। भागवत का आरम्भ #सच से हुआ है।
साभार~~ स्वामी राघवेंद्रदास जी
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