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Showing posts from December, 2025

भ्रममाकुमारी

 #ब्रह्मकुमारी_या_भ्रमकुमारी 'ओम् शान्ति', 'ब्रह्माकुमारी'... हम लोगों ने छोटे-बड़े शहरों में आते-जाते एक साइन बोर्ड लिखा हुआ देखा होगा *'प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय'* तथा मकान के ऊपर एक लाल-पीले रंग का झंडा लगा हुआ भी देखा होगा, जिसमें अंडाकार प्रकाश निकलता हुआ चित्र अंकित होता है। इस केन्द्र में व आसपास ईसाई ननों की तरह सफेद साड़ियों में नवयुवतियाँ दिखती हैं। वे सीने पर *'ओम् शान्ति'* लिखा अंडाकार चित्र युक्त बिल्ला लगाये हुए मंडराती मिलेंगी। आप *विश्वविद्यालय* नाम से यह नहीं समझना कि वहाँ कोई छात्र-छात्राओं का विश्वविद्यालय अथवा शिक्षा केन्द्र है, अपितु *यह सनातन धर्म के विरुद्ध सुसंगठित ढ़ंग से विश्वस्तर पर चलाया जाने वाला अड्डा है।* *स्थापना*:  इस संस्था का संस्थापक *लेखराज खूबचंद कृपलानी* था। इसने अपने जन्म-स्थान *सिन्ध* (पाकिस्तान) में दुष्चरित्रता व अनैतिकता का घोर ताण्डव किया, जिससे जनता में इसके प्रति काफी आक्रोश फैला। तब यह सिन्ध छोड़कर सन *1938 में* कराची भाग गया। इसने वहाँ भी अपना कुकृत्य चालू रखा, जिससे जनता का आक्रोश आसमान पर...

वैदिक विवाह कुष्मांडहोम प्रायश्चित

वैदिकविवाह में आयु अतिक्रमण और अपूर्ण कुष्मांड होम प्रायश्चित बना पाखंड :  देश काल स्थिति का सिद्धांत के पालन के साथ उचित समय पर उचित विधि विधान होने से ही सिद्धि की प्राप्ति होती है - कुष्मांड होम प्रायश्चित का कोई विरोध नहीं हम इस विधान का पूर्ण श्रद्धा से स्वीकार भी करते हैं। यह लेख से हमारा किसी की वैदिक आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं है। किसी के स्वीकार अस्वीकार से हमें कोइ फर्क नहीं पड़ता यह आपका निजी वैदिक अधिकार है - यह वैदिक समय सूचकता हेतु है - जो आजकल दुर्लभ है।शायद आधुनिक काल में किसी को पसंद न भी आए  वर्तमान समय के मेरे निजी वैदिक मर्यादा मूलक विचार है । मूल विषय पढ़ना गहन अभ्यास करना परिबलो का मर्यादा का भी विचार करना  उत्तमोत्तम विश्लेषण होता है।केवल लिखा है तो कर लिया और रहस्यो को न जानना पाखण्ड है -  वैदिक विवाहविधि से कन्यादान का उचित आरंभिक काल - अंतिमकाल अतिक्रमण -भूतकाल -वर्तमान काल पर विचार करें अंत तक जरूर पढ़ें  विद्वज्जनों को निवेदन है आप कोइ भी पक्ष रखें लेकिन सिद्धांत को , समयस्थिति को और जिस समय प्रायश्चित लिखा गया उस प्रायश्चितकाल पर उस ...