सप्तशती पाठ दक्षिणा निर्णय

 सप्तशतीपाठदक्षिणा -


पञ्चस्वर्णाः शतावृत्ते पक्षावृत्ते तु तत् त्रयम्। पञ्चावृत्ते स्वर्णमेकं त्रिरावृत्ते तदर्धकम्। एकावृत्ते पादमेकं दद्याद्वा शक्तितो बुधः।।

इति ((( मारीचिकल्पे))))


यथा "कर्षं सुवर्णस्य सुवर्णसंज्ञम्" लीलावती पाटी गणित


कर्षभर सुवर्ण को सुवर्ण कहते हैं।


तत्रैव - "माषाह्वयैः षोडशभिश्च कर्षम्।


१६ माष का १ कर्ष होता हैं।



तत्रैव - " दशार्धगुंजं प्रवदंति माषः



दश आधी रक्तिका माने ५ गुंजा का १ माष प्रयुक्त हैं।



यथा माष = 5 रक्तिका × कर्ष= 16 माष = 80 रक्तिका अथवा गुंजा 


तुलाधारीका( स्वर्णादि माप की तराजु में तोलनेपर ) ८०रक्तिका साम्य 8 ग्राम सुवर्ण 


100 आवृत्ति -


5 सुवर्ण = ८×५ =४० ग्राम लगभग 4 तोला सुवर्ण 


१५ आवृत्ति


3 स्वर्ण=> 8 × 3 = 24 ग्राम लगभग दोतोला 4 ग्राम सुवर्ण


5 आवृत्ति 


1 स्वर्ण = ८ ग्राम सुवर्ण



3 आवृत्ति 


0।। = ४ ग्राम सुवर्ण 


1 आवृत्ति 


0। = 2 ग्राम सुवर्ण 



इसे वर्तमान के नाणक में गिनने के लिए तात्कालिक जिस प्रदेश में अनुष्ठान करना हो उस प्रदेश के ऑनलाईन स्वर्ण के तात्कालिक मूल्य नेट पर से मिल जाते हैं। 


जैसे कि 1 ग्राम का कितना तत्कालिक मूल्य हैं।

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