प्रणवमंत्र

 ५ प्रकार के प्रणवमंत्रो मे

ओंकार के जप में माता पार्वती का भी अधिकार नहीं- साधारण स्त्री( अनुपनीत) की तो बात ही क्या है-?? 


ईश्वर उवाच ---

      🔥  द्विजातानां सहोंकारः सहितो द्वादशाक्षरः ।

             स्त्रीशूद्राणां  नमस्कारपूर्वकः समुदाह्रतः ।।

          

             प्रणवस्याधिकारो  न  तवास्ति  वरवर्णिनि।

             नमो  भगवते  वासुदेवायेति  जपः  सदा ।।🔥


श्री महादेव कहते हैं  -- 

                     पार्वती ! द्विजों के लिए ओंकार सहित द्वादशाक्षर मंत्र का विधान है तथा स्त्रियों और शूद्रों के लिए ओंकार रहित नमस्कार पूर्वक  ( नमो भगवते वासुदेवाय ) द्वादशाक्षर मंत्र का जप बताया गया है---

              संकरजातियों के लिए रामनाम का षडक्षरमंत्र ( ऊँ रामाय नमः ) है - इसे भी प्रणव से रहित उन्हें जपना चाहिए---

               

पार्वती ! -- प्रणव जप में तुम्हारा अधिकार नहीं है- अतः तुम्हें सदा " नमो भगवते वासुदेवाय " इसी मंत्र का जप करना चाहिए---


  🔥  तस्मात्  सर्शप्रदो  मंत्र सोऽयं  पञ्चाक्षरः स्मृतः।

         स्त्रीभिः शूद्रेश्च संकीर्णैर्धार्यते मुक्तिकाङ्क्षिभिः।।

         नास्य  दीक्षा  न होमश्च न  संस्कारो न  तर्पणम् ।

         न   कालो   नोपदेशश्च   सदा   शुचिरयं   मनुः।।🔥


☛  अतः यह पञ्चाक्षरमंत्र ( नमः शिवाय द्विजों के लिए- 

       द्विजेतरों व स्त्री के लिए शिवाय नमः )  सब कुछ देने 

       वाला माना गया है-- इसे मोक्ष की अभिलाषा रखने 

       वाले स्त्री समुदाय- शूद्र- और वर्णसंकर धारण कर 

       सकते हैं-- इस मंत्र के लिए दीक्षा - होम - संस्कार-

       तर्पण- समय शुद्धि- तथा गुरूमुख से उपदेश आदि 

       की आवश्यकता नहीं है-- यह मंत्र सदा पवित्र है --


" शिव " यह दो अक्षर का नाम बडे - बडे पातकों का नाश करने में समर्थ है -- और उसमें " नमः " पद जोड दिया जाये - तब तो मोक्ष देने वाला हो जाता है ।



हर महादेव 



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