परिचय
मुजसे जुड़ने वाले ॵर मुजसे संलग्न सभी मित्रों को पढ़ना अनिवार्य है।।
में शास्त्री धवल दवे अहमदाबाद गुजरात से हूं>>
सामान्य ब्राह्मण वृत्ति से जीविकोपार्जन करता हूं!!
>>गोत्रादि एकादश ब्राह्मण परिचय उन्ही को दे सकता हूं,जिनसे रोटी बेटी की मर्यादा का संबंध हो या आचार्य ,सजातीय बांधव हो वह भी यह परिचय सार्वजनिक रूप से नहीं दे सकता व्यक्तिगत रूप से कुल शील का ज्ञान होने पर ही दिया जा सकेगा।।
>>>आपका पूर्ण परिचय होने पर ही आपसे संवाद , वाद या प्रतिवाद संभव है अन्यथा किसी विषय वस्तु से संबंधित किसी प्रश्न का कोई प्रतिउत्तर की अपेक्षा न करें।।
में न ज्योतिष,प्रवचन,आयुर्वेद ,तंत्र मंत्र यंत्र आदि से सम्बंधित कोई कार्य नही करता !! जबकि इन विषयों का यथा विधि निषेध ज्ञान है फिर भी अपरिक्षितो का यजनयाजन करने को इच्छुक नहीं रहता।
>>उपरोक्त किसी विषय से सम्बंधित किसी भी कार्य को करने का इच्छुक भी नही हूं।अपने स्थानीय लोगों के लिए
आवश्यक होने पर विचारकर *उचित शास्त्रीय परिक्षण के बाद ही कार्य करता हूं।।*
मठ,मंदिर ,देवालय की पूजा सेवा,पुजारी बनकर पगार पर निर्भर रहना मुझे करना विल्कुल भी पसन्द नही। मंदिर की शास्त्रीय पारंपरिक सेवा के लिए उत्सुक हु लेकिन पगार पर नहि।
दासता ,नॉकरी मुझे पसंद नहीं है।।
..जिस कर्मकांड को करने से मेरा मन विचलित होता हो ऐसा कर्मकांड भी नही करना चाहता।
...किसी को अपना चेला या शिष्य बनाऊ यह भी मुझे पसंद नही।
स्वतंत्रता ,स्वाभिमान पूर्वक जिस कर्म को यथाज्ञान कर सकु वही मेरे लिए महत्वपूर्ण है ।
सामान्य कर्मकांड जीवन से ही सन्तुष्ट हूं इसी से जीवन यापन हो रहा है।।
अपने मूल शंकर परंपरा से जुडे आचार्य जन के शास्त्रोक्त और सैध्धांतिक लेख धर्म प्रचार हेतु सदा प्रेषित करता रहता हूं।
जो मित्र मेरे प्रति जिज्ञासा रखते है मुझसे अपेक्षा रखते है। वह अवश्य ध्यान दे---?
~~~~आपके शास्त्रीय लेख,उचित मार्गदर्शन करते हुए लेख ,जिससे मेरा ज्ञान वर्धन हो ऐसा लेख या शास्त्रीय विचार देने वाले ही इस आभाषी वोटसेप पटल के मेरे सम्मानीय मित्र हो सकते है।अन्य किसी से भी कोई आत्मीय सम्बन्ध यहां बनाना मेरा लक्ष्य नही।।
आप मेरी पोस्ट को ,(लाइक) पसन्द करे__ या टिप्पणी करे या _शेयर करे या_ पढ़े ये आप पर निर्भर करता है --या मात्र बोझ समझकर मुझे अपने साथ रखते है ,यह भी आप पर निर्भर करता है। मुझे अभिमान किसी प्रकार का नही लेकिन स्वाभिमान अपने स्वधर्म पालन नित्य कर्म पर अवश्य है।।
~~~~जय महादेव~~~~
किसी को सम्पर्क सूत्र देना न देना मेरा व्यक्तिगत कार्य है ,आप मुझे वाध्य नही कर सकते।साथ ही इनबॉक्स में उपयोग कभी कभी मेरे यजमान और आचार्यो के लिए करता हु इसलिये आप यदि मित्र है तो उसका उपयोग मेरे लिए न करे ।।
किसी की प्रश्न का या कूतर्क का प्रतिउत्तर देने वाध्य नही हूं।।
और कुछ जानने की जिज्ञासा हो तो उसे आभास करते रहे।
स्वयं का चित्र प्रदर्शन करना मुझे रुचिता नही है।।
जो टाइमपास मेसेज करते है उन्हें में अनदेखा करता हु। व्यर्थ प्रलाप--पसन्द नही।।
मेरे द्वारा मेसेज की गई किसी लेख पर टिप्पणी मात्र व्यवहारिक होती है,उसका उद्देश्य यह नहीं कि आपके मेसेज का समर्थन है,अन्य लोगो के भेजे हुए संदेश मुझे समझ आए इसलिए मेसेज में टिप्पणी करता हूं।
बहुत से लेख वाट्सप आदि पर प्राप्त होते है जिनमे लेखक आदि का नाम नही होता उन्हें भी प्रेषित करता हु।। अब वह किसी व्यक्ति विशेष का हो तो वह अवगत कराएं उसमे उसका नाम लिखा जा सकता है। मेरे द्वारा लिखित अनेको लेख आपको मेरे पेज पर मिल जाएगे
~~अपने आचार्यों और विद्वत वरिष्ठों का सदा कृतज्ञ रहूं_यही महादेव से प्रार्थना है।
आत्मीयता के लिये मेरा परिवार मित्र और सम्बन्धी है-।अपने आत्मीय स्वजनों के साथ ही आनंदित रहता हूं ,जिनके कुल, शील, आचार विचार का ज्ञान हो उन्ही से आत्मीयता रखना चाहिए >> आप क्या है_ कौन है क्या करते है यह सब मुझे जानने की आवश्यकता नहीं>>
आप भी अपने परिवार और सम्बन्धी आदि के साथ स्थानीय मित्रों से आत्मीयता रखें।।
आप से कोई आत्मीयता नहीं मात्र वैचारिक सम्बन्ध ।
अपनी कुलपरंपरा का पालन करनेवाले मित्र और यजमान अन्यो से ज्यादा मेरे लिये महत्वपूर्ण है इससे ज्यादा मित्र बनाना मेरे लिये सम्भव नही।
अधिक समय तक यदि आप नहीं दिखेंगे तो ये समझिए
हम आपको दिखना बंद हो जाएंगे।।
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आप भी अपना स्पष्ट परिचय अवश्य प्रेषित करें।।
जो मित्र मेरे लिए विश्वसनीय है आवश्यक नहीं की आपके लिए भी विश्वसनीय हो इसलिए मेरे गृप के किसी भी मित्र को चुनने से पूर्व स्वयं परीक्षण अवश्य कर ले ।
क्योंकि यहां भी विश्वासघाती और मित्र द्रोही बहुत होते हैं। हमें अनुभव हमने स्वयं अनेको आचार्यो के लिए अपने जीवन के अनेको साल अर्पण करके मेरे जीवन का बलिदान दिया अब आए उनमें से किसी को हमारी आवश्यकता नही हमारे लिए तो वेद-पुराण को मानने वाले कुलीन द्विज संरक्षित विप्र वंदनीय है हमें किसी के उपदेश की जरुरत नहीं
~~निर्दोष में भी नही कुछ दोष मुझमें भी है-लेकिन फिर भी उत्तरोत्तर अच्छा करने का प्रयास करता हु,ओर आपको प्रेरित कर सकूँ यही उद्देश्य मात्र है!!
परिवार के सदस्य भी निर्दोष नही है,, कुछ दोष उनमे
भी हो सकते हैं।
विशेष~~ जो अपने स्थानीय आचार्य, पुरोहित, ब्राह्मण के शास्त्रीय वचनों पर विश्वास नहीं करता, वही लोग यहाँ वहाँ भटकते है, प्रथम आपको चाहिए अपने स्थानीय विद्वत् जनों से विषय वस्तु समझे, अपना आचार्य पुरोहित चुने __हमे आपका आचार्य पुरोहित बनने का कोई उत्साह नहीं__क्योंकि जब आप आचार्य पुरोहित स्थानीय नही बना सके, या आपका कुल आचार्य पुरोहित विहीन रहा तब आपका कल्याण हम कैसे कर सकते है ?
सादर आभाषी धन्यवाद यथोचित अभिवादन
*पं० धवल कुमार शास्त्री*
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