*विशुद्ध अपतित ब्राह्मणो को चाहिये कि* द्विजत्वच्युत , पतित , कुंड , गोलक , गोत्रहीन , क्रियाहीन, व्रात्य ,शाखारण्डदोष आदि दूषित ब्राह्मणों को और अन्य तीन जातियो को एवं पतित,पातकी,महापातकी,

द्विजत्व भ्रष्ट वर्णसंकर ब्राह्मणो को भी न तो प्रणाम करना चाहिए,न चरणस्पर्श। लेकिन हां त्रैवर्णो के लिए तो ब्राह्मण सदा पूजनीय ही रहेगा यही शास्त्र का आदेश है ।


हा! आशीर्वाद बिल्कुल देना चाहिए। यहीं शास्त्रीय मर्यादा है। नारायण

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