चांडाल की उत्पत्ति कैसे होती है?
चारोयुगो मे विशेषतम कलियुग मे ब्राह्मणी स्त्री से अन्य वर्णों के लड़को को स्वप्न में भी विवाह नहीं करना चाहिए । क्योंकि ब्राह्मणी स्त्री अन्य वर्णों के लिए माता समान होती है। माता समान नारी से कदापि विवाह नही होता। 👉 पटेल, कम्मा, रेड्डी, कापू, गौड़ा, नायर, जाट,मराठा, गुज्जर, यादव इत्यादि शुद्ध शूद्र जातिओ से #ब्राह्मणी_कन्या_को_विवाह नही करना चाहिए ना ब्राह्मण लडको को शूद्र जातियो से विवाह करके अपनी #जातिभ्रंशकरण करके अधर्म करना चाहिए 👉 क्युकी गीताजी मे भगवान ने कहा है.. #दोषैरेतैः_कुलघ्नानां_वर्णसङ्करकारकैः। #उत्साद्यन्ते_जातिधर्माः_कुलधर्माश्च_शाश्वताः #143 अपने पूर्वजो ने जो जाति का संरक्षण किया ये पशुवत कामुकता की चाहना मे , इन वर्णसंकर पैदा करनेवाले दोषोंसे कुलघातियों के सदा से चलते आये कुलधर्म और जातिधर्म नष्ट हो जाते हैं। इससे बडा अधर्म क्या हो सकता है ? कलियुग मे #प्रतिलोम विवाह सर्वथा निन्दित है। निकृष्ट विवाहो से बडे कुल भी हीन कुल मे परिणत होते है उन्हे स्वयं श्रौतस्मार्त कर्मो का अधिकार नही रहता है। #शूद्रैव_भार्या_शूद्रस्य_सा_च_स्वा_च_विशःस्मृते। #ते_च_स...