भगवान शिव का गोत्र
भगवान शिवका गोत्र क्या है ? आजतक किसीको पता नहीं था की भगवान शिवका गोत्र कोनसा है ? लेकिन। विवाहके समय तो गोत्रोच्चारकी जरूरत पड़ती ही है। जब माता पार्वतीक साथ भगवानका विवाह हुआ तो नारदजीने भगवानका गोत्र बताया। हिमवानने कहा तात ! महाभाग ! आप अपने गोत्रका नाम बतायें और अपने कुलका विशेषरूपसे परिचय दें। भगवान शङ्करके मुखारविन्दसे इस प्रश्नका कोई उत्तर नहीं मिला। उस समय नारदजी बहुत हँसे और अपनी वीणा बजाने लगे। वह देख बुद्धिमान हिमवानने उन्हें मना करते हुए कहा - 'प्रभो! आप वीणा न बजाइये। पर्वतके ऐसा कहनेपर नारदजी बोले – 'गिरिराज ! तुमने साक्षात् शिवजी से उनका गोत्र बतानेके लिये कहा है; परंतु इनका गोत्र और कुल तो 'नाद' ही है । भगवान शङ्कर न तो किसी कुलमें उत्पन्न हुए हैं और न इनका किसी विशेष कुलसे सम्बन्ध ही है। ये गोत्रों के भी परम गति हैं। महादेवजी नादमें प्रतिष्ठित हैं और नाद उनमें प्रतिष्ठित है। अतः भगवान शिव नादमय हैं और नादसे ही उपलब्ध होते हैं। परंतप ! यही भाव व्यक्त करनेके लिये मैंने इस समय वीणा बजायी है। इनके गोत्र और कुलका नाम ब्रह्मा आदि देवता भी नहीं ज...