विवाह योग्य निर्णय

 विवाह निमित्त जानकारी -:- 


शास्त्रवादी हिंदु सज्जनो ध्यान रखे -- विवाह मे सर्वप्रथम शास्त्रज्ञ विप्र/ब्राह्मण से परिक्षण अवश्य करवाना चाहिए 


कलियुग मे असवर्णविवाह -अनुलोम-प्रतिलोम आदि सभी निषिद्ध विवाह से निंदनीय प्रजाति उत्पन्न होती है।


कन्यादान रजस्वला होने से पूर्व करना चाहिए अन्यथा प्रायश्चित पूर्वक कन्यादान करना चाहिए - 


ब्राह्मण वो ही है जिसके उदर मे वेद है-नित्यसंध्या अग्न्युपासना -देव पितृ कर्म करता हो - जो गुरु परंपरा से वेद नही पढा वो भी अमान्य है - इसके अतिरिक्त ---->>>सभी शूद्र या तो पतित होते हैं वो ब्राह्मण होते ही नही वो मात्र नामधारी ब्राह्मण होते हैं इनमे ब्राह्मणत्व नही होता --


सभी वर्णो को और मनुष्यो को अपनी ही जाति मे विवाह करना चाहिए - 


ब्राह्मण - ब्राह्मणी कन्या 

क्षत्रिय - क्षत्रिय कन्या

वैश्य - वैश्य की कन्या

शूद्र - शूद्रा कन्या 

वर्णसंकर - वर्णसंकरी

कुंडक - कुंडकी 

गोलक - गोलकी

चांडाल - चांडाली

श्वपाक- श्वपाकी

स्वजाति- स्वजाति 


अगर कोइ ब्राह्मण- क्षत्रिय -वैश्य और शूद्र चारो युगो मे निषिद्ध समुद्रपार यात्रा करता है तो उस ब्राह्मण -क्षत्रिय-वैश्य-और शूद्र को भी तत्समान पतित कन्या विवाह के लिए योग्य होती है -


स्वगोत्र मे या मातृवंश के गोत्र मे विवाह अमान्य होने के कारण विवाह करने से पहले कुल परिक्षण करना चाहिए पश्चात ही विवाह संबंधी निर्णय करना चाहिए 


उल्लंघन करने पर दोनो कुल नष्ट हो जाता है धर्मशास्त्र ब्रह्महत्या/जातिहत्या की आज्ञा नही देता


जय श्री राम 🚩

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