पिता पुत्र का मुख देख ले
पितापुत्रस्य जातस्य पश्येच्चेज्जीवतो मुखम् ।।
ऋणमस्मिन्संनयति अमृतत्वं च गच्छति ॥
जातमात्रेण पुत्रेण पितॄणामनृणी पित्ता ॥
तदह्नि शुद्धिमाप्नोति नरकात्त्रायते हि सः ॥ एष्टव्या बहवः पुत्रा यद्येकोऽपि गयां व्रजेत् ॥यजते चाश्वमेधं च नीलं वा वृषमुत्सृजेत् ॥
कांक्षंति पितरः सर्वे नरकांतरभीरवः ॥
गयां यास्यति यः पुत्रः स नस्त्राता भविष्यति।।
_```_पिता यदि उत्पन्न हुए पुत्रका मुख जोवित अवस्थामें एकवार भी देखले तो वह पितरोंके ऋणसे मुक्त होकर स्वर्गको प्राप्त होता है , पुत्रके पृथ्वीपर उत्पन्न होते ही मनुष्य पितरोंके ऋणसे छूट जाता है और उसी दिन वह शुद्ध होता है कारण कि यह पुत्र नरकसे उद्धार करता है ,बहुतसे पुत्रोंकी इच्छा करनी उचित है कारण कि यदि उनमेंसे कोई एक भी पुत्र गयाजीजाय, कोई अश्वमेध यज्ञको करे और कोई नील ब्रैषका उत्सर्ग करे ,नरकसे भयभीत हुए पितृगण "जो पुत्र गयाको जायगा वही हमारे उद्धारका करनेवाला होगा" यह विचारकर ऐसे पुत्रकी इच्छा करते हैं ।॥_```_
पं० धवलकुमार शास्त्री गुजरात
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