शिव-विष्णु और शालीग्राम पूजा मे अधिकार
शिवलिंग, विष्णु और शालीग्राम पूजन मे सभी का अधिकार नही है,तो (ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य) #अप्रायश्चिती_पतित_द्विजो की तो बात ही क्या करे ?
"ह्रीं शिवाय नम:" इस मंत्र से स्त्रियो को पूजन करना चाहिए परन्तु यह आज्ञा पुराणोक्त प्राचीन लिंगो (सोमनाथ,मल्लिकार्जुन,महाकाल,
ॐकार, केदारनाथ, भीमशंकर विश्वनाथ,
त्र्यम्बक,वैद्यनाथ,नागेश,रामेश्वर,गोकर्ण) कि पूजा के विषय मे ही है।
त्रिस्थलीसेतु मे नारद पुराण के यह वचन है कि - जो मनुष्य शूद्र से पूजे हुए शिवलिंग अथवा भगवान विष्णु की प्रतिमा को प्रणाम करता है उसका उद्धार सहस्र प्रायश्चितो के करने से भी नही होता, जो व्यक्ति शूद्र के स्पर्श किये हुए शिवलिंग अथवा विष्णु की प्रतिमा को नमस्कार करता है जबतक चन्द्रमा और तारागण है तब तक वह भांति २ के दुःखों को भोगता है, पाखण्डियो के पूजित लिंग को प्रणाम करके मनुष्य स्वयं भी पाखण्डी हो जाता है,आमीरो (घोसी आदि कों) से पूजे हुए लिंग को प्रणाम करने वाला मनुष्य नरकगामी हो जाता है, जिस शिवलिंग की अथवा विष्णुमूर्ति की स्त्रियो ने पूजा की हो , उसे जो व्यक्ति प्रणाम भी करता है,वह करोडो कुल सहित कल्पपर्यंत रौरव नरक मे दु:ख भोगता है, यह नवीन लिंगो के विषय मे जानना चाहिए। वहा भी यह भी कहा है कि - मन्त्रवेत्ता ब्राह्मण जब लिंग की यथोक्त विधि से प्रतिष्ठा कर चुके तब स्त्री और शूद्रो को लिंग स्पर्श नही करना चाहिए। प्रतिष्ठा मे शूद्र आदि का अधिकार नही है। बृहदन्नारदपुराण मे स्कन्द-पुराण का वचन है कि - हे राजन् ! स्त्रियो शूद्रो और जिनका उपनयन न हुआ हो (#उपनयन_से_भ्रष्ट_हो) एसे व्यक्तिओ को विष्णु तथा शंकर (शिव) के स्पर्श करने का भी अधिकार नही है,जो मनुष्य शूद्र के संस्कार किये हुए लिंग अथवा विष्णुमूर्ति को प्रणाम करता है वह परलोक मे तो क्या इसीलोक मे अत्यन्त दु:खो को देखता है,शूद्र एवं यज्ञोपवीतरहित किम्वा स्त्रिये विष्णुभगवान तथा शिव का स्पर्श करके नरक के दु:खो को भोगती है एसा त्रिस्थलीसेतु मे पूज्यवर हमारे पितामह ने कहा है। #क्रमश:
श्री शालीग्राम को तो अनाधिकारीओ के स्पर्श मात्र से वज्राघात होता है -
वेदनारायणो विजयतेतराम 🏵️🏵️🏵️
पं० धवलकुमार शास्त्री श्री वैदिक ब्राह्मण गुजरात
Comments
Post a Comment