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Showing posts from August, 2024

वैध्व्य दोष परिहार

 ॥ अथ शीतलासप्तमीव्रतम् ॥ 👉वैधव्यदोष परिहार के लिए अपने आचार्यों से मार्गदर्शन प्राप्त करे। श्रावणशुक्ल सप्तम्यां शीतलाव्रतम् ॥ तच्च मध्याह्रव्यापिन्यां कार्यम् ।।  अथ व्रतविधिः स्कान्दे ॥  #संकल्प -:- अद्येत्यादि० ममेह जन्मनि जन्मान्तरे च अवैधव्यप्राप्तये अखंडितभर्तृसंधोगपुत्रपौत्रादिधनधान्यप्राप्तये च शीतलाव्रतं तदङ्गन्त्वेन पूजनं च करिष्ये ॥ इति संकल्प्य  तत्र अष्ट- दलयुते पीठे अत्रणं कलशं संस्थाप्य तदुपरि सौवर्णादिनिर्मितां शीतला- मूर्ति संस्थाप्य ध्यायेत् ।। वंदेऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगंबराम् ॥ मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम् ।। शीतले दह मे पापं पुत्रसौख्य- फलप्रदे ॥ धनधान्यप्रदे देवि पूजां स्वीकुरु ते नमः ।। " शीतलादेव्यै नमः " ध्यायामि ॥ इति शीतलादेवीं ध्यात्वा ततः " ह्रींशीतलायै नमः” इति  मंत्रेणावाहनादिदीपान्तोपचारैः संपूज्य समीपे दधिघृत- मिश्रपक्वान्ननैवेद्यं निधाय " शीतले पंचपक्वान्नदध्योदनयुतं शुभम् ।। नैवेद्यं गृह्यतां देवि घृतमिश्र च सुंदरि" ।॥ इति नैवेद्यं निवेद्य नीराजनं प्रदक्षिणां कृत्वा प्रार्थयेत् ।। " शीतले दह मे पापं पुत्र...

भागवत कथा वक्ता को मुंडन कराना चाहिए

 #कथावाचकोंको_मुण्डन_कराना_चाहिए 🚩 श्रीराम!   भागवतवक्ता के लिए क्षौर ( मुण्डन) का विधान है-- #वक्त्रा_क्षौरं_प्रकर्तव्यम्"  (भाग.मा.६-२३)     फिर आजकल के कथक्कड़ कथक्कड़ीया मुण्डन क्यों नहीं कराते?     यदि कथक्कड़ छोकड़ियाँ यह कहें कि श्लोक में #वक्त्रा ( पु.) ही कहा है, #वक्त्री ( स्त्री.) नहीं कहा है, अतः लड़कियों को मुण्डन कराना आवश्यक नहीं है। तो यहाँ यह प्रश्न भी तो मुह बाये खड़ा होगा कि-- भागवत में विरक्तो वैष्णवो विप्रो कहा है, दृष्टान्तकुशलः कहा है, ये सब पुलिङ्ग में हैं, विरक्ता, वैष्णवी कुशला विप्रा आदि स्त्री लिङ्ग पद भी तो नहीं हैं??😂     यदि विधि का अतिक्रमण करके अनुष्ठान हुआ तो कोई ऐहिक आमुष्मिक गति नहीं होने वाली है। यजमान की भी व कथक्कड़ कथक्कडियों की भी।    विशेष रूप से उन कथक्कडीयों को जो #सच्चिदानन्दरूपाय के आधार पर भागवत का आरम्भ #सच से मानतीं हैं। भागवत का आरम्भ #सच से हुआ है। साभार~~ स्वामी राघवेंद्रदास जी