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Showing posts from February, 2023

परिचय

मुजसे जुड़ने वाले ॵर मुजसे संलग्न सभी मित्रों को पढ़ना अनिवार्य है।। में शास्त्री धवल दवे अहमदाबाद गुजरात  से हूं>> सामान्य ब्राह्मण वृत्ति से जीविकोपार्जन करता हूं!! >>गोत्रादि एकादश ब्राह्मण परिचय उन्ही को दे सकता हूं,जिनसे रोटी बेटी की मर्यादा का संबंध हो या आचार्य ,सजातीय बांधव हो वह भी यह परिचय सार्वजनिक रूप से नहीं दे सकता व्यक्तिगत रूप से कुल शील का ज्ञान होने पर ही दिया जा सकेगा।। >>>आपका पूर्ण परिचय होने पर ही आपसे संवाद , वाद या प्रतिवाद संभव है अन्यथा किसी विषय वस्तु से संबंधित किसी प्रश्न का कोई प्रतिउत्तर की अपेक्षा न करें।। में न ज्योतिष,प्रवचन,आयुर्वेद ,तंत्र मंत्र यंत्र आदि से सम्बंधित कोई कार्य नही करता !! जबकि इन विषयों का यथा विधि निषेध ज्ञान है फिर भी अपरिक्षितो का यजनयाजन  करने को इच्छुक नहीं रहता। >>उपरोक्त किसी विषय से सम्बंधित किसी भी कार्य को करने का इच्छुक भी नही हूं।अपने स्थानीय लोगों के लिए  आवश्यक होने पर विचारकर *उचित शास्त्रीय परिक्षण के बाद ही कार्य करता हूं।।* मठ,मंदिर ,देवालय की पूजा सेवा,पुजारी बनकर पगार पर निर...

मंत्र जप अधिकार

 कोइ भी मंत्र हो गुरुगम्य होना चाहिए। मंत्र-पाठ के जपानुष्ठान से पहले दिक्षा लेना अनिवार्य है, किसी आचरणशील ब्राह्मण हो, शुद्धोच्चारण हो एसे पवित्र ब्राह्मण से सुनकर अनुष्ठान करना चाहिए। मंत्र तारक भी है मंत्र मारक भी है।  पूज्य जगद्गुरु श्री शंकराचार्य गुरूजी  https://youtu.be/GnsnIxbWpzU

प्रणवमंत्र

 ५ प्रकार के प्रणवमंत्रो मे ओंकार के जप में माता पार्वती का भी अधिकार नहीं- साधारण स्त्री( अनुपनीत) की तो बात ही क्या है-??  ईश्वर उवाच ---       🔥  द्विजातानां सहोंकारः सहितो द्वादशाक्षरः ।              स्त्रीशूद्राणां  नमस्कारपूर्वकः समुदाह्रतः ।।                         प्रणवस्याधिकारो  न  तवास्ति  वरवर्णिनि।              नमो  भगवते  वासुदेवायेति  जपः  सदा ।।🔥 श्री महादेव कहते हैं  --                       पार्वती ! द्विजों के लिए ओंकार सहित द्वादशाक्षर मंत्र का विधान है तथा स्त्रियों और शूद्रों के लिए ओंकार रहित नमस्कार पूर्वक  ( नमो भगवते वासुदेवाय ) द्वादशाक्षर मंत्र का जप बताया गया है---               संकरजातियों के लिए रामनाम का षडक्षरमंत्र ( ऊँ रामाय नमः ) है - इसे भी प्र...

सुपारी मे पूजन

वैदिक पद्धति से यजन याजन मे पूगीफल मे आवाह्न करना चाहिए मूर्ति मे पूजन करना हो तो मूर्तिओ का प्रमाण शास्त्रसंमत होना शास्त्रीय विधान है।

ब्राह्मण जन्म से या कर्म से?

 🌷ब्राह्मण जन्मसे या कर्मसे🌷 आजकल कुछ लोग ब्राह्मणों को उपदेश देते है और कर्मणा कर्मणा चिल्लाते है ये पोस्ट उन्हीं के लिए है जिन्हें न तो शास्त्र का ज्ञान है न ही प्रमाण मालूम है समस्त प्रमाण इसीलिए यहां पर डाल दिये गए है जो ब्राह्मण द्रोही और वर्णसंकरता का समर्थक होगा वही शास्त्र प्रमाण कदापि नही मानेगा । वर्ण और जाति अलग अलग नहीं हैं। जैसे आपका शरीर समाज का हिस्सा है, और आपके आंख, कान आदि शरीर के अंग। उसमें भी कोशिका, पुतली, रोम आदि अंगों के भी उपांग हैं। वैसे ही सनातन समाज का हिस्सा वर्ण है और फिर उन वर्णों के अंग तदनुरूप जातियां हैं और जातियों में भी उपजातियां हैं। जैसे घर में अलग अलग कमरे, और कमरों में भी अलग अलग अलमारियों की व्यवस्था है और उनमें भी अलग अलह सांचे बने हैं, वैसे ही समाज रूपी घर में वर्णरूपी कमरे और जातिरूपी अलमारियों की सांचे रूपी उपजातियां हैं। वर्ण समष्टि है और जाति व्यष्टि। कुछ लोग जाति शब्द को संस्कृत का न मानकर यवनों के ‘अल-जात’ शब्द से उसका सम्बन्ध जोड़ देते हैं, उनके भ्रम का निराकरण भी यहीं हो जाएगा। ब्राह्मणो जन्मना श्रेयान् सर्वेषां प्राणिनामिह । (श्री...

शास्त्रीय मार्गदर्शन

यहा पर सभी शास्त्रीय विधि के लिए  अपने अपने शास्त्रीय अधिकार विधि निषेध से आप सभी को संपूर्ण प्रमाण जरूरी परिक्षण के बाद उपलब्ध करवाएगे अपने जीवन को शास्त्र मार्ग से अपनी अपनी शाखा परंपरा से विधि विधान का संपूर्ण शास्त्रोक्त मार्गदर्शन से कर्म की शास्त्रीयता जानने के बाद कभी अशास्त्रीय मार्ग का अवलंबन लेना नहि चाहोगे।  जय शिवशंकर