बिना पत्नी के यज्ञ नही होता
☀️ बिना पत्नी के यज्ञाधिकार की प्राप्ति क्यो नही ? ❓ 👉'अयज्ञो वा एष योऽपत्नीकः ।' (तैत्तिरीयब्राह्मण २।२।२ ) 'जो पुरुष #पत्नीसे रहित है, वह यज्ञके अयोग्य है।' एकचक्रो रथो यद्व देकपक्षो यथा स्वगः । अभार्योऽपि नरस्तद्व दयोग्यः सर्वकर्मसु ॥ ( भविष्यपुराण ) 'जिस प्रकार एक पहियेवाला रथ और एक पाँखवाला पक्षी चलने या उड़नेमें असमर्थ होता है, उसी प्रकार भार्यारहित पुरुष समस्त कर्मोंमें अयोग्य है ।' इसीलिये 'सस्त्रीको धर्ममाचरेत्' लिखा है। अर्थात् पत्नीके साथ ही समस्त प्रकारके धार्मिक कार्य करने चाहिये । #धर्माचारपरां_पुण्यां_साधुव्रतपरायणाम् । #पतिव्रतरतां_भार्या_सुगुणां_पुण्यवत्सलाम् ॥ #तामेवापि_परित्यज्य_धर्मकार्य_प्रयाति_यः । #वृथा_तस्य_कृतः_सर्वो_धर्मो_भर्वात_नान्यथा ॥ ( पद्मपुराण, भूमिखण्ड ५६।६-१० ) 'धर्माचरणमें तत्पर, पुण्यशील, सत्पुरुषोंके व्रतमें परायण, पातिव्रत्य धर्ममें अनुरक्त, सद्गुणसम्पन्न और पुण्य कार्योंमें प्रेम रखनेवाली - ऐसी गुण विशिष्ट पत्नीका परित्याग करके जो धर्म- कार्यमें उद्यत होता...